498a ipc section

gharelu hinsa adhiniyam 2005, 498a ipc section




498a section 

किसी  स्त्री के प्रती या नतेदार द्वारा उसके प्रती कुर्र्ता का व्यव्हार करना: जो कोई किसी स्त्री के पती या पति के नातेदार होते हुए एसी स्त्री के प्रती क्रूरता करेगा वह कारावास से जिसकी अवधी तीन वर्ष तक हो सकेगी दण्डति किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा!

स्पषटीकरन👉👉👉 इस धारा के पर्योजनो के लिये क्रूरता निम्नलिखित अभिप्रीत हैं 

जानबूझकर किया गया कोई आचरण जो एसी प्राकर्ति का जो स्त्री को आत्मा हत्या करने पर मजबूर करने के लिये या उसके जीवन,अंग या स्वास्थ चाहे वह मानसिक हो या शारिरीक के प्रती गम्भीर ऋती या खतरा कारित कारने के लिये उसे प्रेरित करने कि सम्भाव्ना हैं 

किसी स्त्री को तंग करना जहा उसे या उसके समबंधित किसी व्यक्ति किसी सम्पत्ति या प्रतीभूती के लिये विधि विरूध मांग को पूरी करने के लिये प्रपीडित करने को द्रष्टि से या उसके अथवा उससे समबंधित किसी व्यक्ति के एसे मांग पूरी करने मे असफल रहने के कारण इस प्रकार तंग किया जा रहा हैं!

किसी पति को दां दहेज न मिल्ने पर अपनी पत्नी के साथ कृरता का व्यव्हार करना या नातेदार द्वारा क्रूरता का व्यावहार करना यह  498a आइपीसी के अन्तर्गत आता हैं 

धारा 498a के तहत शिकायत दर्ज कब करे? 

धारा ४९८a के तहत अपराध का आरोप लगाते हुए ३ साल के अंदर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कर सकती हैं धारा 373 के अनुसार न्यायलय को ,समय सीमा समापत होने पर भी विचार करने का अधिकार हैं न्याय  के  में ऐसा करना आवयसक हैं 


498a ipc in hindi

धारा 498a में वकील के जरूरत क्यों होती हैं 
भारतीय दंड सहिंता में धारा 498a  एक संजय अपराध हैं जिसमे समय सीमा ३ वर्ष व् कारावास का प्रावधान भी हैं से अपराध से निर्देश किसी भी आरोपी का बच निकला बहुत मुश्किल होता हैं इसलिए आरोपी को निर्देश को साबित करना एक वकील ही कर सकता  हैं क्योकि हम ज्यादार तर लोजो को कानून की जानकारी कही होती हैं पर वकील को निपुण ज्ञान होता हैं जिससे आपके केस जितने के अवसर और भी बाद जाते हैं 



मोस्ट इम्पोर्टेन्ट 

offence👉👉👉 क्रूरता के लिए एक विवाहित महिला के अधीन करने की सजा 

punishment👉👉👉 3 साल + जुर्माना 

cognizance👉👉👉 असज्ञेय 

bail👉👉👉 गैर जमानती 


Trible👉👉👉  मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी 

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